23 साल तक वाइल्डफ्लावर हॉल से प्रदेश को कुछ नहीं, अब मिलेंगे सालाना 37 करोड़ रुपयेः मुख्यमंत्री
शिमला
राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के चोर दरवाजे बंद कर हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाए ठोस कदमः मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला में कहा कि प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के चोर दरवाजों को बंद कर हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य सरकार प्रदेशवासियों और सरकारी कर्मचारियों एवं अधिकारियों के सहयोग से विभिन्न चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि वाइल्डफ्लावर हॉल का मामला वर्ष 2003 से लंबित था और इस मामले में प्रदेश सरकार ने प्रभावी कानूनी पैरवी करते हुए जीत हासिल की। इसके परिणामस्वरूप राज्य सरकार को 401 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि अब ई-नीलामी के माध्यम से प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 37 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि पिछले 23 वर्षों में इस संपत्ति से प्रदेश को कोई राजस्व प्राप्त नहीं हुआ था, लेकिन अब इससे होने वाली आय जनहित के कार्यों पर खर्च की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह धनराशि जनता की है और इसका उपयोग केवल जनता के हित में किया जाएगा। उन्होंने इसे राज्य सरकार की ईमानदार कार्यप्रणाली और स्पष्ट नीयत का प्रमाण बताते हुए कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वह भाजपा नेताओं के नेतृत्व में भी केंद्र सरकार के समक्ष आरडीजी की बहाली का मुद्दा उठाने के लिए तैयार थे, लेकिन भाजपा नेता इसके लिए भी सहमत नहीं हुए। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद होने से प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग आठ से दस हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के सम्मान और उनके सामाजिक एवं आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल की है। हालांकि, इसके परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने प्रदेश को मिलने वाली लगभग 1,600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता बंद कर दी।
उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में नशे की समस्या के रोकथाम के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने सत्ता में आने के बाद चिट्टे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं तथा बार-बार नशा तस्करी में संलिप्त पाए जाने वाले अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पीआईटी एनडीपीएस अधिनियम लागू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल को चिट्टा मुक्त बनाने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है। युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए वॉकाथॉन सहित विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि वह स्वयं भी इन वॉकाथॉन में भाग लेकर युवाओं को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेशवासियों के सामूहिक सहयोग और सरकार के निरंतर प्रयासों से हिमाचल प्रदेश को नशामुक्त बनाने तथा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर राज्य के रूप में विकसित करने के लक्ष्य को हासिल किया जाएगा।
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