स्थानीय उत्पादों को विदेशों में एक्सपोर्ट करेंगे स्वयं सहायता समूह – उपायुक्त
उपायुक्त ने कहा कि फूड प्रोसेसिंग, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट और हर्बल उत्पाद व्यापक स्तर पर स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बनाए जा रहे है। इन की वजह से महिलाओं को घरद्वार पर ही रोजगार मिल रहा है। वहीं महिलाएं अपनी आर्थिकी को मजबूत कर पा रही हैं। प्रशासन का प्रयास स्वयं सहायता समूहों को समय-समय पर सही मंच और प्रशिक्षण मुहैया करवाना है ताकि उनके उत्पादों का कारोबार अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके। उपायुक्त ने कहा कि हम स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता मुहैया करवाने के लिए दिशा में तीव्रता से कार्य कर रहे हैं। हम अपने स्थानीय उत्पादों की पैकिंग, लेबलिंग, ब्रांडिंग आदि पर प्रमुखता से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन स्वयं सहायता समूहों को एक्सपोर्ट काउंसिल में पंजीकरण करवाने को लेकर जागरूक करेगा।
बैठक में एक्सपोर्ट प्रमोशन को लेकर आ रही चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक मेजर संजय कंवर जिला महाप्रबंधक जीआईसी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
यह प्रमुख स्थानीय उत्पाद
जिला शिमला में करीब 5500 स्वयं सहायता समूह पंजीकृत है। इनसे करीब 32 हजार परिवार जुड़े हुए है। ये सहायता समूह आचार, चटनी, जैम, दाल, लाल चावल, शहद, मसालों, सेब की बर्फी, जौ का आटा, चीड़ के पत्तों के उत्पाद, जूट के बैग, स्टफ टायॅज, शाॅल, गर्म कपड़े, बुनाई से बने उत्पाद को लेकर प्रमुख तौर पर शामिल है।
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