जिला टीबी फोरम की समीक्षा बैठक में एडीसी ने दिए निर्देश
हमीरपुर । एडीसी अभिषेक गर्ग ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, फील्ड के डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों और आशा वर्कर्स को निर्देश दिए हैं कि वे जिला को पूरी तरह टीबी मुक्त बनाने के लिए टीबी के मरीजों के इलाज की लगातार निगरानी सुनिश्चित करें। आशा वर्कर्स अपनी उपस्थिति में ही इन मरीजों को दवाई खिलाएं। डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी भी मरीजों के साथ नियमित रूप से संपर्क करके उनका मार्गदर्शन करते रहें।
टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत गठित जिला टीबी फोरम की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अभिषेक गर्ग ने कहा कि टीबी के मरीजों का तुरंत पता लगाने हेतु जिला हमीरपुर के लिए 4 और हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीनें आ गई हैं। इससे, फील्ड में टीबी की जांच को गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि टीबी के मरीज को मुफ्त दवाईयां दी जाती हैं। समय पर इलाज शुरू होने और डॉक्टर के सलाह के अनुसार दवाई खाने पर मरीज पूरी तरह ठीक हो जाता है। लेकिन, जानकारी के अभाव और लापरवाही के कारण कई मरीज दवाई खाना छोड़ देते हैं और उनकी जान चली जाती है। जिला में इस वर्ष अभी तक 523 लोगांे में टीबी की पुष्टि हुई है और इनका तुरंत उपचार आरंभ कर दिया गया है। इस वर्ष जिला में टीबी के 7 मरीजों की मृत्यु हुई है, लेकिन इनमें से अधिकांश मरीज अन्य गंभीर बीमारियों से भी ग्रस्त पाए गए थे। एडीसी ने कहा कि जिला में टीबी से मौत के आंकड़े को शून्य तक लाने के लिए मरीजों की लगातार निगरानी तथा आम लोगों में जागरुकता बहुत जरूरी है।
बैठक में टीबी से पूरी तरह ठीक हो चुके कई मरीजों ने भी अपने अनुभव साझा किए और स्वास्थ्य विभाग का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर सीएमओ डॉ. अजय अत्री, जिला टीबी नियंत्रण अधिकारी डॉ. सुनील वर्मा, विश्व स्वास्थ्य संगठन के कंसल्टेंट डॉ. निकेत और अन्य चिकित्सकों ने भी टीबी मुक्त अभियान से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इसके बाद एडीसी ने बरसात के मौसम में जल जनित रोगों और मक्खी-मच्छर, पिस्सू, विभिन्न बैक्टीरिया, वायरस व परजीवियों से फैलने वाले रोगों से बचाव के उपायों की समीक्षा भी की। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में इन रोगों की आशंका बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए, सभी पेयजल स्रोतों, घरों और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए तथा इसके प्रति आम लोगों को जागरुक किया जाना चाहिए। उन्होंने जिला के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखने तथा कहीं पर भी इस तरह के रोगों के फैलने की सूचना मिलते ही त्वरित कदम उठाने के निर्देश भी दिए।